Dosti shayari , Waqt

Bekhudi
दोस्तों से दोस्ती न हुई  दुश्मनो से प्यार हो गया 

बे खुदी में हम से यह केसा अंजाना इकरार हो गया   

Dosto se dosti na hui magar dushmano se pyar ho gaya                                                   

Be khudi me hum se ye kaisa anjana ikrar ho gaya 

 

वफ़ा वो करेंगे या नहीं हम ये सोचते रहे 

वक़्त हाथो से हमारे रेत के मानिंद बे जार हो गया 

Wafa vo karenge ya nahi hum ye sochte rahe       

WAQT hatho se hamare ret ke manind bejaar ho gaya  

 

ये कैसी शिकन हे माथे पे ये कैसी बेचैनी हे ये

चर्चा तो होना ही था जो सरे बाजार हो गया 

Ye kaisi shikan he mathe pe ye kaisi be chaini he           

  Ye charcha to hona hi tha jo sare bazar ho gaya 

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